Today Thursday, 23 April 2026

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पाकिस्तान से आतंकवादी ही नहीं, डॉक्टर की डिग्री भी आ रही है


इंदौर, मध्य प्रदेश :
अभी कुछ महीने पहले ही दिल्ली बम ब्लास्ट के मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के कई भारतीय मुस्लिम डॉक्टर गिरफ्तार हुए थे जिन्होंने डॉक्टर के पेशे को बदनाम कर दिया, अब एक और सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है जिसमे मध्य प्रदेश के इंदौर में एक जागरूक वकील चर्चित मिश्रा ने खुलासा किया कि यहाँ पर कम से कम 32 ऐसे डॉक्टर हैं जो पाकिस्तानी डिग्री के आधार पर फर्जी दवाखाना खोलकर प्रैक्टिस कर रहे हैं जो इंदौर के गरीब और नासमझ लोगों की जिंदगियों से खेल रहे हैं।  

इंदौर कलेक्टर की पब्लिक हियरिंग के दौरान वकील चर्चित शास्त्री ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 32 डॉक्टर पाकिस्तान डिग्री के साथ फर्जी दवाखाना चला रहे हैं और इस दौरान वकील ने कलेक्टर को पुख्ता सबूत भी सौंपा है जिसके कारण इन डॉक्टरों के खिलाफ जांच करने का आदेश दे दिया गया है। बताया जाता है कि खास तौर पर बागची, पंजवानी या हर्षल क्लिनिक में कई मरीजों को गलत दवा देने से मौत हो चुकी है फिर भी यहां का प्रशासन अब जाग रहा है। 

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) आमतौर पर सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान से मेडिकल डिग्री लेकर आए लोगों को भारत में प्रैक्टिस के लिए मान्यता नहीं देता है, जिसका सीधा सीधा मतलब यह है कि उपर्युक्त लोग बिना वैलिड रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस कर रहे थे और इसके पहले भी कुछ मरीजों की संदिग्ध मौत के मामले में साल 2022 में पाकिस्तानी डिग्री वाले एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था। वैसे सैकड़ों कश्मीरी डॉक्टर पाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए है जो साल 2000 के शुरुआती महीनो में पाकिस्तान पढ़ाई के लिए गए थे और उस वक्त कश्मीर में अलगाववाद चरम पर था इसलिए पाकिस्तान भी इसका फायदा उठाते हुए कश्मीर के छात्रों के लिए सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, विशेष रूप से एमबीबीएस और इंजीनियरिंग के लिए एक विशेष कोटा की पेशकश की थी जिसमें आवास और ट्यूशन फीस मुफ्त था लेकिन पाकिस्तान में ढंग की पढ़ाई हुई या नहीं यह हमेशा संदेह के घेरे में रहा है क्योंकि वहां इंजीनियरिंग या एमबीबीएस की डिग्री के बजाय मजहबी पढ़ाई को सर्वोपरि रखा जाता है। 

इंडियन मेडिकल एशोसियशन और भारत सरकार को भी ऐसे उभरते हुए संवेदनशील विषय पर सख्त से सख्त कदम उठा कर कार्यवाई करनी चाहिए जिससे समस्या विकराल होने से पहले ही इस पर लगाम लगाई जा सके। इसलिए ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए सभी आम नागरिकों को जागरूक रहना चाहिए और दवाखाना में जाने से पहले डॉक्टर के डिग्री और पढ़ाई के बारे में हर जानकारी अवश्य लें एवं दूसरों को भी बताएं जिससे आम लोगो की जान बच सके। 

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